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राजपूती शौर्य: वीरता की अमर गाथा | Rajput Veer Gatha Shayari - King Peedia

rajput-shayari राजपूतो का इतिहास कोई नहीं चुरा सकता जब तलवारें चमकती थीं रौशनी में, सिर झुकाने को तैयार थे दुश्मन भी जमीं में। रानी पद्मिनी ...

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राजपूतो का इतिहास कोई नहीं चुरा सकता


जब तलवारें चमकती थीं रौशनी में,

सिर झुकाने को तैयार थे दुश्मन भी जमीं में।


रानी पद्मिनी ने जौहर की ज्वाला में समाई,

राजपूतों की वीरता ने दुश्मनों की नींद उड़ाई।


सिंहासन हिला, लेकिन हिम्मत नहीं डगमगाई,

रणभूमि में दिखा वो जज़्बा, जो कभी नहीं मिटाई।


कुर्बानी की मिसालें, हर मोड़ पे है सजाई,

राजपूतों का इतिहास, कभी न खो सके कोई परछाई।


वो खून में जोश, वो आंखों में चमक,

राजपूतों की आन-बान, कोई नहीं चुरा सकता।


राजपूतों की शान और गौरव


तलवार की धार पर नाचती है तकदीरें,

राजपूतों की जुंबिश से कांपें ये जमीं और ये फिजाएं।


राणा प्रताप का घोड़ा चेतक भी जानता था,

वीरता का मतलब क्या होता है, ये मानता था।


अखंड राजपूताना की गाथाएं हम सुनाते हैं,

वीरों की कहानियों से दिलों को सजाते हैं।


रक्त का वो रंग, जिसमें बसी है वीरता,

राजपूतों की विरासत में गूंजी है भव्यता।


मुगलों ने देखी थी रणभूमि की आग,

राजपूतों की वीरता का था ऐसा स्वाभाव।


कोई मिटा नहीं सकता वो गौरवशाली इतिहास,

राजपूतों के पराक्रम का है ये अमिट उल्लास।


शब्दों में पिरोया है जो अभिमान,

वो शौर्य का गीत, वो साहस का बखान।


कोई नहीं छीन सकता वो गर्व और स्वाभिमान,

राजपूतों का इतिहास है अद्वितीय, महान।


राजपूतों का गौरवमयी इतिहास


अर्जुन के बाणों सी, चमकती वो वीरता,

हर राजपूत की रगों में बसी है जज़्बा।


मेवाड़ की धरती पर जन्मे वो वीर,

हल्दीघाटी की मिट्टी में लिखा उनका अधीर।


खून में उबाल, दिलों में है आग,

राजपूतों की आन-बान, अद्वितीय परचम का राग।


सिर कटा, पर झुका नहीं, यही है उनकी पहचान,

वीरता की दास्तां में दर्ज है उनका सम्मान।


रक्त से लिखी वो कहानियां, न मिटा सके कोई ज़माना,

राजपूतों के शौर्य की, गूंजे सदा ये तराना।


कुंभलगढ़ की दीवारें, गढ़े वो किले,

हर ईंट में है दर्ज, उनकी वीरता के सिलसिले।


आगरा की जंग हो या चित्तौड़ की माटी,

राजपूतों के शौर्य की, हर ओर है बाती।


गुज़रते वक़्त की रेत में, अमर हैं उनके नाम,

राजपूतों का इतिहास, कोई न ले सके चुरा।


राजपूतों की वीरता का अमर इतिहास


किस्सों में बसे हैं, वो राजपूतों के जज्बे,

तलवार की धार पर लिखे गए, वो शौर्य के सबक।


मर्दानी रानी झांसी, हो या पृथ्वीराज की तीर,

हर एक वीरता की दास्तान में, राजपूतों का ही सजीव नीर।


चेतक की टापों से, थर्राया था मैदान,

राणा की शौर्यगाथा, बसी है जन-जन की जान।


अकबर से लोहा लिया, मानी न कभी हार,

राजपूतों की वीरता का, हर युग में है उद्धार।


वो ऊंचे किले, वो गौरवमयी वास्तु,

राजपूतों की धरोहर, अमर है उनकी आस्था।


भामाशाह का बलिदान, किया था जिसने दान,

राजपूतों की आन-बान, हर दिल में बसे महान।


वो बप्पा रावल का स्वाभिमान, और राणा सांगा की शान,

हर वीरता की गाथा में, है उनका अमर पहचान।


महलों से लेकर रणभूमि तक, हर जगह है उनका मान,

राजपूतों का इतिहास, कोई नहीं कर सकता अनजान।


लहू से सींची जो जमीं, वो कहती है ये कहानी,

राजपूतों की वीरता का, कोई नहीं छीन सकता ये निशानी।


राजपूतों की अमर कहानियाँ


काली घटाओं में चमकती वो तलवारें,

राजपूतों की वीरता से जलती ये मशालें।


वीर दुर्गादास ने मुगलों को दिया था जवाब,

राजपूतों के साहस का, ये एक और अनुपम बाब।


जोहर की ज्वाला में, रानियों का बलिदान,

कुमकुम के रंग में रची, उनकी अमर पहचान।


जैसलमेर के सोनार किले की मिट्टी,

राजपूतों की शौर्यगाथा, हर ईंट में है बसी।


आन का परचम, झुका नहीं कभी,

राजपूतों की ताकत, कभी रुकी नहीं कभी।


पृथ्वीराज चौहान की बंदी से भी, गूंजी थी उनकी गर्जना,

मोहम्मद गोरी ने देखी, राजपूतों की अटल संकल्पना।


पन्नाधाय का त्याग, बलिदान की वो मिसाल,

राजपूतों के इतिहास में, अमर है ये हाल।


हर एक राजा, हर एक रानी,

उनकी गाथाएं गूंजे, जैसे हो कोई सुहानी।


वीरता का वो उत्सव, जो चलता है सदियों से,

राजपूतों की धाक, अब भी बसी दिलों में है।


मिटा नहीं सकता कोई, वो सुनहरी यादें,

राजपूतों का इतिहास, सदा अमर रहे।


वो सजीव कहानियां, वो जिंदा किस्से,

राजपूतों का गौरव, कोई न छीन सके।


राजपूतों की वीरगाथा


रण में लहू बहा, पर झुके नहीं थे कभी,

राजपूतों की बहादुरी से, कांपे दुश्मन सभी।


चित्तौड़ के किले से निकली, वो शौर्य की धारा,

रणबांकुरों ने दिखाई, वीरता की चमकती धारा।


अमर सिंह राठौड़ की, अद्वितीय कहानी,

राजपूतों की शान में, जोड़े एक और निशानी।


बीकानेर के राजा, गंगा सिंह की बात,

राजपूतों की वीरता, हर एक पल है याद।


राणा सांगा की तलवार, थी दुश्मनों की हार,

कभी झुके नहीं, चाहे कितना भी हो वार।


वीर दुर्गादास ने, संभाली जो आन,

मुगलों के आगे, नहीं झुका राजस्थान।


मेवाड़ के महाराणा, थे जिनके आगे जहां,

उनकी वीरता की गाथाएं, गूंजे हैं सारे जहां।


वो जसवंत सिंह का साहस, जो दिखा था हर युद्ध में,

राजपूतों की वीरता, जैसे हो सजीव हर रुद्र में।


राजपूतों की धरती, वीरों की ये जमीं,

उनकी वीरता की महिमा, गाए सदा ये धरा।


कोई नहीं मिटा सकता, वो गौरवशाली इतिहास,

राजपूतों की शौर्यगाथा, बसी है हर सांस।


हर एक किले की दीवार, कहे उनकी कहानी,

राजपूतों का साहस, कोई नहीं छीन सके निशानी।


वो अमर पराक्रम, वो अटूट विश्वास,

राजपूतों का इतिहास, सदा रहेगा खास।


राजपूतों की वीरता के अमर सपूत


कहते हैं हर लहर, हर हवा का झोंका,

राजपूतों की शौर्यगाथा, किसी ने नहीं रोका।


वो महाराणा कुम्भा, वास्तुकला का नायक,

कुंभलगढ़ की दीवारें, उनकी कारीगरी की प्रत्यक्ष मायक।


राजसमंद की झील में, बसी है उनकी छवि,

राजपूतों की वीरता, सदियों से खड़ी है सजीव।


रणथंभौर का सिंह, था हम्मीर का नाम,

उनकी वीरता के चर्चे, हैं हर जगह अविराम।


वो मीराबाई की भक्ति, और महाराणा की शक्ति,

राजपूतों की भूमि पर, अद्वितीय है ये युक्ति।


राजपूतों की शान में, रची कई महाकाव्य,

उनकी वीरता का गान, गाता हर पावन ग्रंथ।


तारागढ़ की ऊंचाईयों से, दिखता है वो पराक्रम,

राजपूतों की वीरता, जो नाप सके न कोई मर्म।


मारवाड़ की मिट्टी में, बसा है वीरता का रंग,

राजपूतों का इतिहास, है स्वाभिमान का संग।


भामाशाह का बलिदान, और जैसलमेर का सोना,

राजपूतों की वीरता, है धरा का खजाना।


चित्तौड़ के किले से, गूंजती है अब भी पुकार,

राजपूतों की वीरता, है सदा अमर, अटल, अपार।


वो पुष्कर की भूमि, वो अजमेर की आन,

राजपूतों की शौर्यगाथा, गूंजे सदा महान।


कोई नहीं छीन सकता, वो गर्व और स्वाभिमान,

राजपूतों का इतिहास, सदा रहेगा महान।


राजपूतों की गौरवगाथा


वो रणबांकुरों की टोली, वो तलवारों की चमक,

राजपूतों के इतिहास में, है वीरता की दमक।


रानी दुर्गावती की, वीरता का वो नाम,

गोंडवाना की रानी ने, लिखा था नया आयाम।


जयपुर का आमेर, और उदयपुर की झील,

राजपूतों की शान में, है ये दिलकश महफ़िल।


जोधपुर के मेहरानगढ़, से दिखता है वो साहस,

राजपूतों की आन में, बसी है सच्ची आभास।


वीरवर राणा सांगा, जिनकी तलवार थी महान,

उनकी वीरता के चर्चे, हैं आज भी सजीव बयान।


महाराणा प्रताप का हल्दीघाटी, रणभूमि का वो वीर,

चेतक के संग दौड़े, दिखा दिया वो अधीर।


बीकानेर का जूनागढ़, और जैसलमेर की रेत,

राजपूतों की वीरता, बसी है इनकी सेत।


वीरता का वो आदर्श, जो लिखी है हर दीवार,

राजपूतों के इतिहास का, अद्वितीय है ये अपार।


पृथ्वीराज की कहानियां, और हाड़ी रानी का बलिदान,

राजपूतों की धरती पर, लिखा हर वीर का गान।


वो जौहर की ज्वाला, और कुंभलगढ़ का अभिमान,

राजपूतों की वीरता का, कोई नहीं कर सकता अपमान।


मिट्टी की वो खुशबू, जो रण में बहा खून,

राजपूतों का इतिहास, है जैसे अमर जून।


गाथाएं सुनाएं जो, हर पीढ़ी को सिखाएं,

राजपूतों की शौर्यगाथा, कोई नहीं भुला पाए।


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