Page Nav

HIDE

Classic Header

{fbt_classic_header}

Top Ad

Breaking News:

latest

चौहान राजपूतों का इतिहास Chouhan Rajput History

Chouhan Rajput History चौहान राजपूतों ( Chouhan Rajput ) का इतिहास भारतीय इतिहास के महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। इन्होंने मध्यकालीन काल मे...

Chouhan Rajput History
Chouhan Rajput History


चौहान राजपूतों ( Chouhan Rajput ) का इतिहास भारतीय इतिहास के महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। इन्होंने मध्यकालीन काल में उत्तर भारत के कई हिस्सों पर शासन किया और उनका योगदान भारतीय समाज और राजनीति के विकास में महत्वपूर्ण रहा है। चौहान राजपूत वंश ( Chouhan Rajput Vansh ) का उत्पत्ति अग्निवंश में माना जाता है, जिसकी उत्पत्ति धुंधार से हुई। इस वंश की उपलब्धि में चीमा, चाहल, चौहान, चहार, चठा, चिल्लर जैसी अनेक जनजातियाँ शामिल हैं। इनके शाखाओं में सांचोरा, सोंगारा, लोनिया हड़ा, देवड़ा, भादुरियास, चावन, राजकुंवर आदि शामिल हैं। 


इन्होंने अपने शासनकाल में नडोल, जालोर, धुंधार, अजमेर, दिल्ली, हरियाणा, नीमराणा, हड़ौती, गोदवार, अवध जैसे क्षेत्रों पर शासन किया और कई रियासतें स्थापित की। चौहान राजपूतों ( Chouhan Rajput ) की वीरता, धैर्य, और साहस की कहानियाँ भारतीय इतिहास के महान अंग में सम्मिलित हैं, जो आज भी हमें प्रेरित करती हैं। उनका इतिहास और उनकी वीरता भारतीय समाज में आज भी महत्वपूर्ण स्थान रखती है।


चौहान राजपूत वंश


चौहान राजपूत वंश ( Chouhan Rajput Vansh ) भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इस वंश की उत्पत्ति अग्निवंश (Agnivanshi) में मानी जाती है, जिसकी मान्यता धुंधार से है। चौहान वंश का इतिहास मध्यकालीन भारतीय इतिहास के साथ गहराई से जुड़ा है, जब यह वंश उत्तर भारत के कई क्षेत्रों पर राज करता था। चौहान राजपूतों ( Chouhan Rajput ) का वंश उनके वीरता, साहस, और समर्पण के लिए प्रसिद्ध है। इनके शाखाएं और प्रमुख प्रजातियों में चीमा, चाहल, चौहान, चहार, चठा, चिल्लर आदि शामिल हैं। चौहान वंश के उत्कृष्ट योद्धा और राजनेता इतिहास में महान प्राणी माने जाते हैं, और उनका योगदान भारतीय समाज और संस्कृति के विकास में महत्वपूर्ण रहा है। चौहान वंश का इतिहास आज भी हमें उनके वीरता, धैर्य और समर्पण की प्रेरणा देता है।


चौहान राजपूत शाखाएं


चौहान राजपूत वंश ( Chouhan Rajput Vansh ) के अंतर्गत कई शाखाएं थीं, जो उनकी विविधता और समृद्धि को दर्शाती हैं। इन शाखाओं में सांचोरा, सोंगारा, लोनिया हड़ा, देवड़ा, भादुरियास, चावन, राजकुंवर आदि शामिल हैं। हर शाखा अपने विशेष इतिहास, सांस्कृतिक विरासत, और शासन क्षेत्रों में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखती थी। इन शाखाओं के सदस्य अपनी वीरता, साहस, और शौर्य के लिए प्रसिद्ध रहे हैं और उनकी कथाएं भारतीय इतिहास में अमर हैं।


चौहान राजपूत रियासतें


चौहान राजपूतों ( Chouhan Rajput ) ने अपने शासनकाल में कई प्रमुख रियासतें स्थापित की जो उनके साम्राज्य का विस्तार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन रियासतों में से कुछ प्रमुख शामिल हैं:


  1. अजमेर: चौहान राजपूतों ( Chouhan Rajput ) की मुख्य राजधानी अजमेर थी और इसे उन्होंने अपनी प्रमुख रियासत के रूप में विकसित किया।
  2. रांथंबोर: रांथंबोर भी चौहान राजपूतों ( Chouhan Rajput ) की एक महत्वपूर्ण रियासत थी जो मुख्यतः किले के लिए प्रसिद्ध थी।
  3. तुलसीपुर: तुलसीपुर भी चौहान राजपूतों ( Chouhan Rajput ) की एक प्रमुख रियासत थी, जिसका इतिहास लंबे समय तक चला।
  4. मैनपुरी: यह भी चौहान राजपूतों ( Chouhan Rajput ) की एक प्रमुख रियासत थी, जो उत्तर भारत में स्थित थी।
  5. देवगढ़ बाड़िया: इस रियासत का भी चौहान राजपूतों ( Chouhan Rajput ) के समय में महत्वपूर्ण योगदान रहा।


ये रियासतें चौहान राजपूतों ( Chouhan Rajput ) के शासनकाल में उनके साम्राज्य की महत्वपूर्ण अंग थीं और इनका इतिहास राजपूत शासन की महत्वपूर्ण यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।



इतिहास चौहान वंश
वंश अग्निवंशी
उत्पन्न धुंधार
सामान्य जन्मजाति चीमा, चाहल, चौहान, चहार, चठा, चिल्लर
शाखाएं सांचोरा, सोंगारा, लोनिया हड़ा, देवड़ा, भादुरियास, चावन, राजकुंवर।
शासन किया नडोल, जालोर, धुंधार, अजमेर, दिल्ली, हरियाणा, नीमराणा, हड़ौती, गोदवार, अवध।
रियासतें अजमेर (7वीं शताब्दी-1365) रांथंबोर (1236–1302) तुलसीपुर (7वीं शताब्दी-1857 ई।) मैनपुरी देवगढ़ बाड़िया बुंदी सिरोही कोटा राजपूत बार्दिक खातों में चौहानों को चार अग्निकुल राजपूत शाखाओं में से एक के रूप में वर्णित किया जाता है जो यज्ञ से उत्पन्न होने का दावा करती है।

कोई टिप्पणी नहीं