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राजपूत वोटर्स की नाराजगी बीजेपी को पड़ी भारी, पश्चिमी UP से लेकर राजस्थान में दिखा असर

Angry Rajput Voters Shake BJP: Impact on Recent Elections in Western UP, Churu, Rajasthan, and Haryan
Lok Sabha Election 2024



चुनाव से पहले कई जगहों पर राजपूत समाज के लोगों ने बीजेपी को वोट न देने को लेकर अपील भी की थी। लोकसभा चुनाव 2024  (Lok Sabha Election 2024) में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को बहुमत से दूर करने के लिए कई फैक्टर्स ने काम किया। राजपूत फैक्टर भी उनमें से एक है, जो बीजेपी के लिए भारी साबित हुआ। राजपूतों की ये नाराजगी पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर राजस्थान तक अपना असर दिखा रही है।


राजपूत वोटरों का रोष पश्चिमी यूपी में



राजपूत वोटरों का रोष पश्चिमी यूपी में बीजेपी के खिलाफ विधानसभा चुनाव 2022 में साफ़ दिखा। टिकट बंटवारे और प्रत्याशी के चयन में राजपूतों का अहसास कम या नगरहै। सहारनपुर में एक महापंचायत में राजपूतों ने अपना विरोध प्रकट किया, जब बीजेपी ने टिकट देने से इनकार किया और इससे नाराजगी का संकेत मिला। 


गाजियाबाद में भी एक समान परिस्थिति थी, जहाँ रिटायर जनरल वीके सिंह की जगह अतुल कुमार गर्ग को टिकट दिया गया था, जिससे राजपूत समुदाय में नाराजगी का अनुभव हुआ। यह नाराजगी चुनावी नतीजों में भी प्रतिष्ठित हो रही है, जैसे कि सहारनपुर में बीजेपी हारी और इमरान मसूद जीते, जिससे राजपूत वोटों का महत्व और उनके विपक्ष में उत्तरदायित्व बढ़ गया।

निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदुओं को लेकर नवीन चुनावों में राजपूत समुदाय के प्रभाव को लेकर यहां कुछ महत्वपूर्ण बातें हैं:

  1. पश्चिमी उत्तर प्रदेश: सहारनपुर जैसे क्षेत्रों में राजपूत मतदाताओं ने खुलकर अपने असंतोष का इजहार किया, जहां उन्होंने बीजेपी के अंदर टिकट वितरण पर अपना असंतोष जताया। इस असंतोष ने बीजेपी को राजपूत समुदाय से वोट हासिल करने में चुनौती प्रदान की।
  2. सहारनपुर: यहां राजपूतों ने बीजेपी के खिलाफ अपना असंतोष जाहिर किया, और इस असंतोष ने कांग्रेस प्रत्याशी इमरान मसूद को 64,542 वोटों की बड़ी बहुमत से बीजेपी के प्रत्याशी राघव लखनपाल के खिलाफ जीत दिलाई।
  3. मुजफ्फरनगर: बीजेपी के टिकट वितरण से राजपूतों के बीच असंतोष रहा। यहां, एसपी प्रत्याशी हरिंद्र सिंह मालिक ने 24,672 वोटों की बड़ी बहुमत से बीजेपी के प्रत्याशी संजीव कुमार बाल्यान को हराया।
  4. कैराना: यहां राजपूतों का प्रतिशत लगभग 6% है। बीजेपी को असंतोष का सामना करना पड़ा, जब इसने एक गुज्जर उम्मीदवार को टिकट दिया, जिससे उनकी प्रदर्शन पर असर पड़ा। बीजेपी इस सीट पर हारी।
  5. मेरठ: यहां राजपूतों का प्रतिशत लगभग 6% है। बीजेपी इस सीट पर विजयी रही, लेकिन उसे प्रारंभिक चरणों में चुनौती आई, जब उनके प्रत्याशी अरुण गोविल को पीछे छोड़ दिया गया, लेकिन बाद में उन्होंने 10,585 वोटों की बड़ी बहुमत से जीत हासिल की।

राजपूतों का बोध सहारनपुर में



राजपूत समाज का बोध सहारनपुर में चुनावी माहौल में गहराई से महसूस हो रहा है। वहाँ, राजपूतों ने अपनी आवाज़ बुलंद की और अपने संघर्ष को जाहिर किया। एक महापंचायत के माध्यम से राजपूत समाज ने अपने विरोध को प्रकट किया और बीजेपी के प्रति असंतोष जताया। 

यह अभिव्यक्ति न केवल राजपूत समाज के आत्मविश्वास को बढ़ाती है, बल्कि उनकी राजनीतिक भूमिका में भी एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है। इससे साफ है कि राजपूत समुदाय के विचारों और धारावाहिकता का सम्मान किया जाना चाहिए, जिससे समाज के सभी वर्गों का समृद्धि और समानता की दिशा में योगदान हो सके।


राजस्थान में राजपूतों का दबदबा



राजस्थान में राजपूत समुदाय का दबदबा स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। यहाँ, राजपूत समाज ने अपने आदिकारिक और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को मजबूत किया है। विधानसभा चुनाव में राजपूत वोटरों का भूमिका विशेष महत्वपूर्ण रहा, जो इस समुदाय की प्रभावशाली भूमिका को पुनः पुष्टि करता है। बाड़मेर-जैसलमेर, जोधपुर, चित्तौड़गढ़, राजसमंद, चुरू और कोटा जैसे क्षेत्रों में राजपूत समुदाय की आवाज़ गहनता से सुनाई गई है। उनकी आकांक्षा, उनके हितों और मुद्दों के प्रति सरकार की जिम्मेदारी को लेकर उत्साहित करने में महत्वपूर्ण है। 


राजपूत समाज का दबदबा उनके सामाजिक संरचना, राजनीतिक अनुभव और सामाजिक सहभागिता में सुदृढ़ता का परिणाम है, जो इस प्रदेश की राजनीतिक दृष्टि में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस बदलाव के साथ, समाज की सभी वर्गों को मिलकर प्रगति की दिशा में आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है।


चुरू में धक्का बीजेपी को



चुरू में विधानसभा चुनाव के दौरान धक्का बीजेपी के लिए साफ़ हो गया। यहाँ, बीजेपी के प्रतिष्ठित उम्मीदवार देवेंद्र झाजरिया को वोटों में उम्मीद से कम हार का सामना करना पड़ा। राजस्थान के इस क्षेत्र में राजपूत समुदाय की भूमिका और उनके मतों का महत्व उच्च है। चुरू में हार का कारण बीजेपी के केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला की टिप्पणी है, जिससे राजपूत समाज में असंतोष और नाराजगी का संकेत मिला। इस घटना से स्पष्ट होता है कि राजस्थान के राजपूत समुदाय के मतों और उनके आदिकारिक प्रतिनिधित्व का महत्व निहित है, जो राजनीतिक प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

राजस्थान में बीजेपी का परिणाम


राजस्थान में बीजेपी का परिणाम विवादित रहा। विधानसभा चुनाव में, बीजेपी ने कुछ सीटों पर अच्छे परिणाम प्राप्त किए, लेकिन कुछ स्थानों पर उन्हें हार का सामना करना पड़ा। चुरू, जोधपुर, चित्तौड़गढ़, राजसमंद, और कोटा जैसे क्षेत्रों में, जहां राजपूत समुदाय की आबादी अधिक है

बीजेपी को चुनौती जेलनी पड़ी। यह चुनावी परिणाम दिखाते हैं कि राजस्थान में राजपूत समुदाय के विचारों और मतदाताओं का महत्व बढ़ गया है, जो राजनीतिक पारिस्थितिकी को प्रभावित करता है। इससे साफ होता है कि राजपूत समुदाय के साथ अच्छे संबंध बनाए रखना राजस्थान के राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण है।


हरियाणा में भी राजपूत समुदाय की जागरूकता



हरियाणा में भी राजपूत समुदाय की जागरूकता महसूस किया जा रहा है। नई दिल्ली से लेकर हरियाणा तक, राजपूतों का समर्थन और उनकी आवाज़ को समझा जा रहा है। यहां, राजपूत समाज के प्रतिनिधित्व ने अपने मुद्दों को उच्चतम स्तर पर उठाया है। हरियाणा में राजपूत समुदाय के स्थानीय नेता और प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों ने अपने समुदाय के हित में उठाये गए मुद्दों पर जोर दिया है। 


इससे स्पष्ट होता है कि हरियाणा के राजपूत समुदाय का समर्थन और उनके मतों का महत्व राजनीतिक प्रक्रिया में बड़ा है। राजनीतिक दलों को राजपूत समुदाय की आवाज को समझने और समर्थन करने के लिए सतत प्रयास करना आवश्यक है, ताकि सामाजिक समानता और विकास के मामले में सभी को समान अवसर मिल सकें।


नतीजा


हरियाणा में राजपूत समुदाय के समर्थन और उनके मतों का महत्वपूर्ण रहा है। चुनावी प्रक्रिया में, राजपूत समुदाय के प्रतिनिधित्व ने विभिन्न विधानसभा सीटों पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनकी आवाज और समर्थन ने हरियाणा की राजनीतिक प्रक्रिया को प्रभावित किया है और उन्हें राजनीतिक दलों के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प बनाया है। यह दिखाता है कि राजपूत समुदाय के साथ अच्छे संबंध बनाए रखना हरियाणा के राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण है, ताकि वे समाज के सभी वर्गों के हित में काम कर सकें।


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