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मारवाड़ के वीर राठौड़ राजपूत वंश का गौरवशाली इतिहास | Rathod Rajput History

Rathod Rajput History राजस्थान की पवित्र धरती ने हमें अनगिनत वीर और विद्रोही राजपूत वंशों का गौरवपूर्ण इतिहास प्रदान किया है। इन वंशों में स...

Rathod Rajput History
Rathod Rajput History


राजस्थान की पवित्र धरती ने हमें अनगिनत वीर और विद्रोही राजपूत वंशों का गौरवपूर्ण इतिहास प्रदान किया है। इन वंशों में से एक है राठौड़ जो मारवाड़ के महान और प्रख्यात राजपूत वंशों में से एक है। इस लेख में, हम राठौड़ वंश का अद्वितीय इतिहास और महत्वपूर्ण घटनाओं को प्रस्तुत करेंगे, जो उन्हें भारतीय इतिहास के प्रसिद्ध वीरों में शामिल करती हैं।


वंश का उत्पत्ति


वंश का उत्पत्ति: राठौड़ वंश का उत्पत्ति भारतीय पौराणिक कथाओं में सूर्यवंशी राजपूतों के रूप में होता है। यह वंश भगवान राम के पुत्र लव के पुत्र, कुश से आगे बढ़ता है। राठौड़ वंश की परंपरा के अनुसार, इसका प्रारंभिक उत्पत्ति कन्नौज (गहड़वाला) से हुआ था। यहां से इस वंश का संबंध गहड़वाल राजवंश से आगे बढ़ा, जिसका सूर्यवंशी राजपूतों के साथ गहरा संबंध था। राठौड़ वंश के लोग सूर्य देवता के संतान के रूप में अपने आप को समझते हैं, जिससे उनका वंश सूर्यवंशी या 'सूर्य के परिवार' के रूप में भी जाना जाता है।


राठौड़ वंश के शाखाएँ


  • मेरटिया
  • जैतावत
  • सिंधल
  • भड़वत उड़ावत
  • चंपावत
  • कुम्पावत
  • जोधा
  • बिका
  • जैतावत
  • जैमलोट / पटावत
  • वढ़ेर
  • रूपावत
  • बालावत
  • चंदावत
  • रायपालोट

राठौड़ वंश के प्रभुत्व की सूची


राज्य शासनकाल
मरवाड़ (1226-1949) जोधपुर
बीकानेर (1488-1949) बीकानेर
बट-द्वारका (गुजरात) बट-द्वारका
किशनगढ़ (1611-1949) किशनगढ़
इदर (1728-1949) इदर
रतलाम (1651-1949) रतलाम
सितामऊ (1701-1949) सितामऊ
सैलाना (1730-1949) सैलाना
कोटरा (1350-1755) कोटरा
अलीराजपुर (1701-1949) अलीराजपुर
मांडा
पूंछ (1596-1798) पूंछ
अमृतपुर (1857-वर्तमान) अमृतपुर

मारवाड़ का विजय


मारवाड़ का विजय: राठौड़ वंश का विजय मारवाड़ के प्रमुख राज्य की स्थापना में निहित है। 1226 में शेओजी ने पाली को जीता, जो बाद में जोधपुर नाम के समृद्ध शहर का निर्माण किया। राठौड़ वंश ने मारवाड़ के कई प्रमुख शहरों को अपने अधीन किया, जिसमें मंडोर, पाली, जालोर, नागौर आदि शामिल हैं। इनके विजय मार्ग में कई टेक्निकल और सामरिक योजनाओं ने उन्हें समृद्धि की ओर अग्रसर किया। राठौड़ राजपूतों के शौर्य, साहस और समर्थन का उनका इतिहास मारवाड़ की विजय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


महाराजा जोधा और मेहरांगढ़ का निर्माण


महाराजा जोधा और मेहरांगढ़ का निर्माण: मेहरांगढ़ किला राठौड़ वंश के महान शौर्य और विजय का प्रतीक है। महाराजा जोधा ने 1459 में मेहरांगढ़ किले की नींव रखी। यह किला जोधपुर से कुछ मील दूर भकुरचीरिया पर स्थित है। किले के निर्माण के दौरान, जोधा ने यहाँ कई धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन किया। मेहरांगढ़ किला उनके साहस और स्वाभिमान का प्रतीक बना और आज भी राजस्थान के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है।


जोधपुर की विकास और रक्षा


जोधपुर की विकास और रक्षा: जोधपुर शहर राठौड़ वंश के एक महत्वपूर्ण केंद्र बना। महाराजा जोधा के शासनकाल में, शहर की विकास और समृद्धि का अद्वितीय अध्याय था। जोधपुर को एक मजबूत सुरक्षित शहर बनाने के लिए महाराजा रतेजी मलदेव ने कई रक्षा कार्यक्रमों को आयोजित किया। शेर शाह की धमकी के बाद, राजपूत शासक ने शहर की फिर से बुनियाद रखी और उसकी रक्षा के लिए कई नए किले और दीवारें निर्मित की। इन रक्षा कार्यक्रमों ने जोधपुर को एक सुरक्षित और समृद्ध नगर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


समापन


राठौड़ वंश की उत्कृष्टता, उनके धैर्य और साहस का इतिहास उन्हें एक अद्वितीय स्थान प्रदान करता है। उनका इतिहास हमें भारतीय इतिहास के प्रसिद्ध और प्रेरणादायक चरित्रों के बारे में जानने का अद्वितीय अवसर प्रदान करता है।


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